बुधवार, अक्टूबर 24, 2012
गुरुवार, अक्टूबर 18, 2012
बुधवार, अक्टूबर 10, 2012
अग़ज़ल - 46
ये दर्द मेरे दोस्तों की मेहरबानी का असर है
अपनों ने रची हैं जो साजिशें, उनकी हमें खबर है ।
इसका नतीजा क्या होगा, यह तुम भी जानते हो
पत्थर हैं उनके हाथ में, और मेरा कांच का घर है ।
जो बहुत शोर मचाया करते थे दोस्ती का अक्सर
जब दुश्मनों को गिना, पाया उनका नाम भी उधर है ।
जिसके आसरे का था गरूर हमें, वो धोखा दे गया
बरसात का मौसम शुरू होते ही, गया आशियाँ बिखर है।
मेरे मरे हुए सब अरमानों को तुम दफना देना कहीं
मुझे अब फिर से इन सबके जिन्दा हो जाने का डर है ।
मैं समेट रहा हूँ विर्क खुद को अपने आगोश में
महफिल की बात न करो, तन्हाई मेरा मुकद्दर है ।
अपनों ने रची हैं जो साजिशें, उनकी हमें खबर है ।
इसका नतीजा क्या होगा, यह तुम भी जानते हो
पत्थर हैं उनके हाथ में, और मेरा कांच का घर है ।
जो बहुत शोर मचाया करते थे दोस्ती का अक्सर
जब दुश्मनों को गिना, पाया उनका नाम भी उधर है ।
जिसके आसरे का था गरूर हमें, वो धोखा दे गया
बरसात का मौसम शुरू होते ही, गया आशियाँ बिखर है।
मेरे मरे हुए सब अरमानों को तुम दफना देना कहीं
मुझे अब फिर से इन सबके जिन्दा हो जाने का डर है ।
मैं समेट रहा हूँ विर्क खुद को अपने आगोश में
महफिल की बात न करो, तन्हाई मेरा मुकद्दर है ।
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स्थान:
Mandi Dabwali, भारत
शनिवार, सितंबर 29, 2012
बेवफाई ( हाइकु )
स्थान:
Mandi Dabwali भारत
शुक्रवार, सितंबर 14, 2012
हिंदी की पुकार ( कविता )
मैं हिंदी हूँ
हिन्दुस्तान की बेटी हूँ
न देखो मुझे
किसी जाति से जोड़कर
किसी सम्प्रदाय से जोड़कर
किसी क्षेत्र से जोड़कर
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
चाहती हूँ प्यार सबका
बांटती हूँ प्यार सबको
पिरोती हूँ एक सूत्र में
पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली
सभी भाषाएँ हैं भगिनी मेरी
चल सकती हूँ मैं साथ सबके
ओ हिंद वासियों
सुनो पुकार मेरी
ओ हिंद वासियों
सुनो पुकार मेरी
न करो विरोध मेरा
किसी भाषा को लेकर
छोडो संकीर्णता
तोड़ो भाषाई बंधन
जुडो़ मुझसे
मुझसे जुड़कर जुडो़गे तुम
इस देश से
खुद से
मैं हिंदी हूँ
हिन्दुस्तान की बेटी हूँ ।
**************
स्थान:
सिरसा, हरियाणा, भारत
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