न चाहो ताज, सबके सिर पर ताज नहीं होता
मिले मुहब्बत, इससे बढ़कर एजाज़ नहीं होता।
परहेज़ ही काम करता है इस इश्क़ में यारो
इस मर्ज़ के मरीज़ का इलाज नहीं होता।
अश्क बहाते, ग़म उठाते हैं लोग वहाँ के
वफ़ा निभाना यहाँ का रिवाज नहीं होता।
हिम्मत हो पास तो अभी मुमकिन है सब कुछ
कल कैसे होगा वो काम, जो आज नहीं होता।
चेहरे पे मासूमियत झलकती है ख़ुद-ब-ख़ुद
सीने में छुपाया जिसने राज़ नहीं होता।
यही ख़ासियत इसकी, इस पर एतबार करना
प्यार भरा दिल ‘विर्क’ दग़ाबाज़ नहीं होता।
दिलबागसिंह विर्क
******




