मुझे तेरा इंतज़ार था, मुझे तेरा इंतज़ार है
अब ये तू देख, यह पागलपन है या प्यार है।
सुकूं किसे नहीं चाहिए मगर न मिले तो क्या करें
उसका भी मज़ा ले रहे हैं, दिल अगर बेक़रार है।
ज़माने के मौसमों संग नहीं बदलते मौसम मेरे लिए
जब तक तेरे आने की उम्मीद है, तब तक बहार है।
दिल को न जाने क्यों लगे, हर पल तू क़रीब है मेरे
हक़ीक़त में अगर मैं इस पार हूँ, तो तू उस पार है।
ये बात और है कि हम इसे तोड़ पाएँगे या नहीं
टूट तो सकती है, रिवाजों की ये जो दीवार है।
चाहे यह ज़माना आज़माए, चाहे तुम आज़माना
मुहब्बत के हर इम्तिहां के लिए ‘विर्क’ तैयार है।
दिलबागसिंह विर्क
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