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रविवार, जनवरी 05, 2014

सोमवार, जनवरी 07, 2013

देश का न्याय

आदमी जिंस 
दुनिया है बाज़ार 
प्यार कहाँ है ?
कछुए से भी 
दौड़ में हार रहा 
देश का न्याय ।
एक कोढ़ है 
देश के जिस्म पर 
ये क्षेत्रवाद ।

देखते सब 
औरों की गलतियाँ 
अपनी नहीं ।

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बुधवार, नवंबर 21, 2012

कितनी ही दीवारें

जाती व धर्म 
कितनी ही दीवारें 
खींची हमने ।
चाय-पानी से 
होता है हर काम 
कार्यलयों में ।
ईश्वर एक है 
ये कहते हैं सभी 
मानते नहीं ।
झूठा प्रचार 
होता है चुनावों में 
सभी के द्वारा ।

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शनिवार, सितंबर 29, 2012

बेवफाई ( हाइकु )

बेटा चाहिए 
बेटी का है आज भी 
दर्जा दोयम ।
बस्तों का बोझ 
ढो रहा बचपन 
ये कैसी शिक्षा ?
बेवफाई तो 
आदत आदमी की 
हर क्षेत्र में ।
झूठा प्रचार 
होता है चुनावों में 
सबके द्वारा ।

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रविवार, अगस्त 26, 2012

स्वार्थी दुनिया ( हाइकु )

दिखावा बढ़ा 
धार्मिकता गायब
ये किस धर्म ?
तोड़ लेती है
टहनियों से फूल 
स्वार्थी दुनिया ।
गांधारी होना 
महानता कम है
 मूर्खता ज्यादा ।

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शुक्रवार, अगस्त 03, 2012

कैसी आजादी ? ( हाइकु )

इस युग में 
बढती नफरत
घटता प्यार ।

न गम स्थायी  
न ख़ुशी ही है स्थायी 
सब नश्वर  ।

चंद मिसालें 
क्या हो गई इससे 
नारी स्वतंत्र ।

आज भी वही 
लाठी वाले की भैंस 
कैसी आजादी ?

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मंगलवार, जुलाई 10, 2012

रखो शिष्टता ( हाइकु )

भाषा जोडती 
लोगों को आपस में 
तोडती नहीं ।

रखो शिष्टता 
चाहे समर्थन हो 
चाहे विरोध ।

सच के लिए 
नहीं बोलोगे तुम 
पछताओगे ।

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रविवार, जून 10, 2012

बांसुरी हम ( हाइकु )

विकल्प कहाँ 
जनता के सामने 
राजनीति में ।
बांसुरी हम 
गूँज रहा है नाद 
कोई अज्ञात ।
पालतू नहीं 
दहशतगर्द तो 
जंगली कुत्ते ।
खुद को छोड़ 
जीए औरों के लिए 
वही जीवन ।

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शनिवार, मई 26, 2012

संवाद करो ( हाइकु )

क्षेत्र का राग 
अलापते अक्सर 
कैसे ये नेता ?

सबका गम 
महसूस करो तो 
अपना लगे ।

संवाद करो 
असहमति पर 
विवाद नहीं ।

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शनिवार, मई 12, 2012

जीवहत्या क्यों ?( हाइकु )

कस्तूरी होती 
अपने ही भीतर 
ढूंढें बाहर ।
जीवन देना 
जब वश में नहीं 
जीवहत्या क्यों ?

मेहनत को 
मानते कर्मशील 
अन्य  भाग्य को ।

अहमियत 
हार-जीत की नहीं 
कोशिश की है ।

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शुक्रवार, अप्रैल 20, 2012

सहारा तिनके-सा ( हाइकु )

बनना तुम
सहारा तिनके-सा
धूप सर्दी की ।
जवाब मांगो 
हमारे वोटों से ही
मिली है सत्ता ।
सोचते नहीं
लकीर को पीटते
लोग अक्सर ।
बमों से कभी
फैसले नहीं होते
विनाश होता ।

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शुक्रवार, अप्रैल 06, 2012

ये दुआ करो ( हाइकु )

झूठ की जीत
सच की हार नहीं
हमारी हार ।
लोकतंत्र को
बनाओ मजबूत
स्वस्थ चर्चा से ।
गीता पढता
फल की चिंता मन
छोड़ता नहीं ।
महके फिजा
प्यार की खुशबू से
ये दुआ करो ।

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बुधवार, जुलाई 27, 2011

हाइकु गीत

                   खुद बेवफा 
                   दूसरों से चाहते 
                   करें वो वफा .

                   सच कहा तो 
                   तमाम दोस्त मेरे 
                   हो गए खफा .

                   कपटी हम
                   ऐसे में क्यों न होगा 
                   नाराज़ खुदा .

                   न्याय करना 
                   चाहिए था जिनको 
                   करते जफा .

                   सत्ता पाते ही 
                   दिखाने लगे नेता 
                   नखरे - अदा .

                   खोटे सिक्के हैं 
                   बाजारे - दुनिया में 
                   ये प्यार - वफा .

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