अपाहिज कोई
जिस्म से नहीं होता
सोच से होता है
जो सोच से अपाहिज है
वह स्वस्थ होते हुए भी
हार जाता है ज़िन्दगी से
और जो
सोच से अपाहिज नहीं
वह अपाहिज होते हुए भी
धत्ता बता देता है
हर मुश्किल को
और सफलता
कदम चूमती है उसके ।
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