ख़ुशी का न हुआ मेरी जिन्दगी में आगाज
गम मेरी खामोशी , गम ही मेरी आवाज ।
दिल का दर्द दिखाना चाहता था मैं मगर
दिखा पाया सिर्फ चंद आंसू , चंद अल्फाज ।
क्या मजबूरियां थीं मालूम नहीं लेकिन
दफन होकर रह गया सीने में एक राज ।
खुद को टटोलने की जहमत भी उठा लेता
काश ! जाने से पहले वो कह जाता दगाबाज ।
दामन में भर दो जमाने भर की रुसवाइयां
कब माँगा है मैंने किसी से कोई एजाज ।
शायद यही एक कमी थी जीने के ढंग में
उठा न पाया मैं विर्क इस जिन्दगी के नाज ।
गम मेरी खामोशी , गम ही मेरी आवाज ।
दिल का दर्द दिखाना चाहता था मैं मगर
दिखा पाया सिर्फ चंद आंसू , चंद अल्फाज ।
क्या मजबूरियां थीं मालूम नहीं लेकिन
दफन होकर रह गया सीने में एक राज ।
खुद को टटोलने की जहमत भी उठा लेता
काश ! जाने से पहले वो कह जाता दगाबाज ।
दामन में भर दो जमाने भर की रुसवाइयां
कब माँगा है मैंने किसी से कोई एजाज ।
शायद यही एक कमी थी जीने के ढंग में
उठा न पाया मैं विर्क इस जिन्दगी के नाज ।
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