बुधवार, सितंबर 07, 2016
बुधवार, अगस्त 24, 2016
रंग
गुलाबी, उनाबी
रंग ही तो रंगीन करते हैं
जीवन को
चेहरे पर लगे रंगों से
खिल उठते हैं चेहरे
मगर चेहरों पर
रंग सिर्फ़ लगाया नहीं जाता
चेहरे खुद भी रंग बदलते हैं
चेहरों का रंग बदलना
बेरंग करता है रिश्तों को
रंग बदलते चेहरों के बीच
रिश्तों का बेरंग हो जाना
सबसे बड़ी त्रासदी है
इस युग की |
दिलबागसिंह विर्क
*****
बुधवार, जुलाई 27, 2016
उलझन
आँखों की भाषा
पढाई नहीं जाती कहीं भी
मुस्कराहटों के अर्थ
मिलते नहीं किसी शब्दकोश में
तुम्हारी आँखें
तुम्हारी मुस्कराहटें
सीधा-सादा गद्य कब कहती हैं
कभी वे
मुझे इजाजत देती लगती हैं
प्यार के इजहार का
कभी वे
लगती हैं मेरा मुँह चिढ़ाती हुई
क्या समझ सकोगे मेरी उलझन
क्योंकि एक ही अर्थ नहीं होता
आँखों की कूट भाषा का
कविता-सी मुस्कान का
दिलबागसिंह विर्क
*****
बुधवार, जुलाई 13, 2016
बुधवार, जुलाई 06, 2016
सदस्यता लें
संदेश (Atom)



