बुधवार, मार्च 18, 2020
बुधवार, मार्च 11, 2020
ज़िंदगी
जीवन
उथले पानी में
बीता है
जीवन सारा
और अक्सर
हमने बात की है
गोताखोरी की
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ज़िंदगी – 1
पक्षियों का कलरव
भँवरों का गुंजार
फूलों का खिलना
हवा का चलना
है ज़िंदगी
यह अर्थ नहीं रखती
महज काटने में
इसे तो जीया जाता है
चहककर
महककर
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ज़िंदगी – 2
ज़िंदगी की परतों के
भीतर ही कहीं
छुपी रहती ज़िंदगी
जैसे छुपा हो
हारिल कोई
हरे पत्तों के बीच
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बुधवार, फ़रवरी 26, 2020
बुधवार, फ़रवरी 19, 2020
ये ज़रूरी तो नहीं
"ये ज़रूरी तो नहीं" मेरी110 ग़ज़लनुमा कविताओं का संग्रह है, जिन्हें आप ब्लॉग पर भी पढ़ सकते हैं और ebook के रूप में भी | दोनों के लिंक निम्न हैं -
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बुधवार, फ़रवरी 12, 2020
फिर होगा मौसम ख़ुशगवार, इंतज़ार करना
मैं लौटकर आऊँगा यार, इंतज़ार करना
लाऊँगा फिर नई बहार, इंतज़ार करना।
ग़म के बादल में कब तक छुपेगा ख़ुशी का चाँद
होगा कभी-न-कभी दीदार, इंतज़ार करना।
माना बेक़रारियाँ बहुत हैं सफ़रे-प्यार में
इन्हीं में से मिलेगा क़रार, इंतज़ार करना।
दिल की सदा तुम दिल तक पहुँचने तो दो
फिर होगा मौसम ख़ुशगवार, इंतज़ार करना।
दिल के खेल होते शतरंज की बिसात नहीं
जीत का मज़ा देगी हार, इंतज़ार करना।
दिलदार लोगों की कोशिशें ‘विर्क’ रंग लाएगी
चारों तरफ़ फैलेगा प्यार, इंतज़ार करना।
दिलबागसिंह विर्क
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