जुदा होकर जब तुम मुझसे दूर चले जाओगे
क्या बताएँ तुम्हें, तब कितना याद आओगे।
शामिल हो तुम मेरे ख़्यालों-ख़्वाबों में
यादों की ख़ुशबू से तन-मन महकाओगे।
दोस्ती की बेल पर खिलते ही रहेंगे फूल
अगर रंजिशों को अपने दिल से मिटाओगे।
जब भी समेटना चाहोगे, न रहेगी पास
ख़ुशी वापस मिलेगी, जब इसे फैलाओगे।
क़िस्मत मौक़े मुहैया कराएगी यक़ीनन
अगर तुम ख़ुद को बार-बार आज़माओगे।
दूरियाँ देखना कभी मुद्दा नहीं होंगी
जब भी सोचोगे, ‘विर्क’ क़रीब पाओगे।
दिलबागसिंह विर्क
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