शनिवार, अगस्त 13, 2011

षटपदीय - 4

           देखो देश की एकता , देखो यहाँ का प्यार 
      हर शख्स दूसरे से है , लड़ने को तैयार .
      लड़ने को तैयार , बैठे हैं भाई - भाई
      शांति पथ प्रगति का , यह बात समझ न आई .
      वेदों के देश में , कुछ तो वेदों से सीखो 
      कहता ' विर्क ' सबसे , तुम अपने भीतर देखो .

                             * * * * *

7 टिप्‍पणियां:

S.N SHUKLA ने कहा…

bahut khoobsoorat prastuti
.
रक्षाबंधन एवं स्वाधीनता पर्वों की शुभकामनाएं स्वीकार करें .

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति..रक्षाबंधन एवं स्वाधीनता पर्वों की शुभकामनाएं

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन....रक्षाबंधन एवं स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएँ.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं.

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

विर्क साहब स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

mahendra srivastava ने कहा…

अच्छी रचना,
अच्छा संदेश

आशा जोगळेकर ने कहा…

लड़ने से फुरसत मिले तब न अपने भीतर देखेंगे । स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं ।

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