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शनिवार, नवंबर 22, 2014

राम भरोसे

राम भरोसे चल रहा, मेरा भारत देश 
इसे लुटेरे लूटते, धर साधू का वेश। 
धर साधू का वेश, सभी ने भरी तिजौरी 
ठग, भ्रष्ट और चोर, करें हैं सीनाज़ोरी । 
कहता सबसे ' विर्क ', कौन अब किसको कोसे 
भारत देश महान, चले है राम भरोसे । 

दिलबाग विर्क 
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शुक्रवार, अक्टूबर 04, 2013

अमृतधारा है आशा


आशा से संसार है, रखना दिल में आस 
 मंजिल होगी पास में, करते रहो प्रयास ।
 करते रहो प्रयास , झोंक दो पूरी ताकत 
 जीवन होगा सफल, न टिक पाएगी आफत ।
 मत डालो हथियार, हराती हमें हताशा 
 कहता सबसे 'विर्क', अमृतधारा है आशा ।

दिलबाग विर्क 
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बुधवार, जुलाई 03, 2013

खत्म हुआ है प्यार

नफरत बढती जा रही, खत्म हुआ है प्यार 
रिश्तों - नातों पर यहाँ , हावी है व्यापार । 
हावी है व्यापार , देखतें हैं बस मतलब 
हो जब मुश्किल वक्त, काम आया कोई कब । 
सदगुण सारे छोड़ , बना ली कैसी आदत 
अपनाए गुण आज, स्वार्थ, ईर्ष्या औ' नफरत । 

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मंगलवार, नवंबर 13, 2012

जलें दीप से दीप


दीवाली त्यौहार पर, जलें दीप से दीप 
सब अन्धकार दूर हों, हो रौशनी समीप ।
हो रौशनी समीप, उमंग जगे हर घर में 
करें तमस का नाश, हो उजास विश्व भर में ।
कहे विर्क कविराय, भरे खुशियों की थाली 
फैले हर्षोल्लास , मनाएं जब दीवाली ।

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सोमवार, मार्च 05, 2012

होली आई झूम के

होली का त्यौहार है, रंगों की बौछार ।
चुटकी एक गुलाल से, बढ़े आपसी प्यार ।।
बढ़े आपसी प्यार, फैलता भाईचारा ।
किया जब भी प्रयास, मिटा मनमुटाव सारा ।।
कहता सबसे ' विर्क ', गले मिलना हमजोली ।
मिटाकर भेदभाव, खेलना मिलकर होली ।।

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होली आई झूम के, डाल रहे सब रंग ।
शक्ल हुई बदशक्ल है, हुए सभी बदरंग ।।
हुए सभी बदरंग, अजब-सी मस्ती छाई ।
जश्न मनाते सभी, ख़ुशी है बेहद पाई ।।
भीग रही है रूह, भीगते कुरता-चोली
सब नर नारी ' विर्क ', खेलते मिलकर होली ।।

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दिलबागसिंह विर्क
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शुक्रवार, फ़रवरी 24, 2012

पूजा होता प्यार

कब नाता है जिस्म से , आत्मा का व्यापार।
जाति-उम्र ना देखता , अंधा होता प्यार ।
अंधा होता प्यार , बात ये दिल की माने ।
जाने बस दिलदार , और ना कुछ भी जाने ।
पूजा होता प्यार , प्यार ही होता मजहब ।
बन जाता तूफ़ान , मानता है बंधन कब ।

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सोमवार, जनवरी 16, 2012

आरक्षण की मार

आरक्षण  की  मार  है , रही  देश  को  मार ।
इक जाति कभी दूसरी , मांगे ये अधिकार ।।
मांगे ये अधिकार , नहीं इसका हल कोई   ।
करें  हैं  तोड़ - फोड़ , व्यर्थ में ताकत खोई ।।
कहे विर्क कविराय , नहीं दिखते शुभ लक्षण ।
हो सुविधा की मांग , न मांगो तुम आरक्षण ।।

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शनिवार, दिसंबर 31, 2011

हो मुबारिक साल नया

नव  जीवन  की  आस  ले , आया है नव वर्ष 
माहौल  बने  शान्ति  का , फैले  हर-सू  हर्ष ।
फैले  हर - सू  हर्ष , यही  कोशिश  हो  सबकी 
सुधरें कुछ हालात, मिले न किसी को धमकी ।
संभव  है  बदलाव , अगर  ठानें  सबका  मन 
नए वर्ष के साथ , करें शुरू हम नव जीवन ।

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साल  नया  है  आ  गया , मनाओ  भले  जश्न 
पर सुधरें हालात  भी , कुछ करना तुम यत्न ।
कुछ करना तुम यत्न, पथ प्रगति का अपनाएं 
फैलाएं  सद्भाव  ,  वैर   भाव   सब   मिटाएं ।
कर  आगे  का  ध्यान , भुला दे जो बीत गया 
कहता  सबसे  विर्क, हो मुबारिक साल नया ।

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रविवार, दिसंबर 18, 2011

हिम्मत

            हिम्मत से जो काम ले, करता वही कमाल 
            दुनिया को वह बदल दे, बनता एक मिसाल ।
            बनता एक मिसाल , बुलंद इरादे जिसके 
            देकर सबको मात , सितारा बनकर चमके ।
            कभी न मानो हार , न कोसो अपनी किस्मत 
            कहे विर्क कविराय, जीत लेती जग हिम्मत ।


                                * * * * *

बुधवार, अक्टूबर 26, 2011

कुंडलिया छंद - 2


                      
        
         दे सबको संदेश यह , दीपों का त्यौहार 
         रौशन सारा विश्व हो , मिट जाए अँधियार ।
         मिट जाए अँधियार , मिटे अज्ञानता सारी 
         अज्ञानता ही आज , शाप है सबसे भारी ।
         रौशनी और ज्ञान , यहाँ तक भी हो, फैले 
         कहे ' विर्क ' कविराय, दीप संदेश यही दे ।

                          * * * * * *

शुक्रवार, अप्रैल 22, 2011

कुंडलिया छंद -1

               कन्या भ्रूण हत्या                            
                       

बेटी मरती गर्भ में ,हम सब जिम्मेदार 
चुप्पी धारण की तभी ,होता अत्याचार .
होता अत्याचार , हुई  प्रताड़ित नारी 
वेदों का है देश  ,लगाते कलंक भारी .
कहत 'विर्क' कविराय , हो रही इससे हेठी 
कहलाओ इन्सान ,  मारते हो तुम बेटी .

                 * * * * *  
                        हेठी --- अपमान ,बेइज्जती 
                       * * * * *
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