शुक्रवार, फ़रवरी 24, 2012

पूजा होता प्यार

कब नाता है जिस्म से , आत्मा का व्यापार।
जाति-उम्र ना देखता , अंधा होता प्यार ।
अंधा होता प्यार , बात ये दिल की माने ।
जाने बस दिलदार , और ना कुछ भी जाने ।
पूजा होता प्यार , प्यार ही होता मजहब ।
बन जाता तूफ़ान , मानता है बंधन कब ।

* * * * *

9 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!

vidya ने कहा…

सच में...
प्यार दीवाना होता है...

Suman ने कहा…

nice

वाणी गीत ने कहा…

पूजा होता है प्यार !!
भावनात्मक अभिव्यक्ति !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

बहुत सुन्दर! कल ही कहीं पढ़ रहा था कि प्यार अंधा होता है और शादी आँखे खोल देती है !:)

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

प्यार तो सच आत्मा का ही व्यापार है ......बहुत खूब !

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut sundar bhaav.

Asha Saxena ने कहा…

सुन्दर भाव लिए रचना |
आशा

anju(anu) choudhary ने कहा…

वाह बेहद खूबसूरत प्रस्तुति

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