बुधवार, अप्रैल 06, 2016

परिवर्तन के लिए

आग उगलें शब्द 
फड़कने लगें बाजू 
कविता पढ़कर
ज़रूरी तो नहीं 

अल्फ़ाज़ हर बार 
प्रेरित करें लोगों को 
बंदूक उठाने के लिए 
कब ज़रूरी है यह 

विरोध की भाषा का 
बन्दूकों से ही बोला जाना 
कहाँ ज़रूरी है 

परिवर्तन के लिए 
काफ़ी होता है 
विचारों की एक लहर का उठाना 
मन-मस्तिष्क में 

हमें तो करनी है 
विचारों की खेती 
क्योंकि 
बंदूकें तो 
कभी-कभार लिखती हैं 
विचार अक्सर लिखते हैं 
परिवर्तन की कहानी |

दिलबागसिंह विर्क 
******

2 टिप्‍पणियां:

महेश कुशवंश ने कहा…

सुंदर अति सुंदर

रश्मि शर्मा ने कहा…

परिवर्तन के लिए
काफ़ी होता है
विचारों की एक लहर का उठाना
मन-मस्तिष्क में ....बि‍ल्‍कुल सही लि‍खा आपने।

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