बुधवार, अप्रैल 27, 2016

मध्यम मार्ग

घर में
पत्नी और बच्चों की फरमाइशें
दफ्तर में
बॉस के आदेश
इन्हीं की पालना करते रहना ही
क्या नियति है आदमी की

कोल्हू के बैल की तरह
एक धुरी पर घूमते रहना ही
क्या मकसद है जीवन का

अगर नहीं तो
क्या उचित है
आवारा सांड बन
जगह - जगह मुँह मारना

क्या कोई मध्यम मार्ग भी होता है
कोल्हू के बैल
और आवारा सांड के बीच

तलाश जारी है
मध्यम मार्ग की
लेकिन नियंत्रण कहाँ है
बुलेट ट्रेन - सी दौड़ती उम्र पर |

******

3 टिप्‍पणियां:

Harsh Wardhan Jog ने कहा…

कुछ frustration सी है जो और कोई दूसरा नहीं सुलझेगा.

महेश कुशवंश ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
महेश कुशवंश ने कहा…

कथन भी है बुलेट ट्रेन सा , झरने सा बहता हुआ , बधाई

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