शुक्रवार, अप्रैल 06, 2012

ये दुआ करो ( हाइकु )

झूठ की जीत
सच की हार नहीं
हमारी हार ।
लोकतंत्र को
बनाओ मजबूत
स्वस्थ चर्चा से ।
गीता पढता
फल की चिंता मन
छोड़ता नहीं ।
महके फिजा
प्यार की खुशबू से
ये दुआ करो ।

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10 टिप्‍पणियां:

expression ने कहा…

नेक सन्देश
हायेकु में समेटे
ये है कमाल

:-)

सादर.

Sunil Kumar ने कहा…

सभी हाइकू अर्थ समेटे हुए अच्छे लगे बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

दो-तीन दिनों तक नेट से बाहर रहा! एक मित्र के घर जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन मंगलवार को फिर देहरादून जाना है। इसलिए अभी सभी के यहाँ जाकर कमेंट करना सम्भव नहीं होगा। आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया हाईकु!

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक हाइकु...

Sushil Kumar Joshi ने कहा…

इतना कम
सब कह दिया
बचा क्या?

रचना दीक्षित ने कहा…

सुंदर विचारों से ओत प्रोत बेहतरीन हाइकू.

Rajesh Kumari ने कहा…

sundar haaiku.prerna dete hue.

***Punam*** ने कहा…

गीता पढता
फल की चिंता मन
छोड़ता नहीं ।

yatharth.....!!

anju(anu) choudhary ने कहा…

वाह बहुत ही सटीक हाइकु

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