बुधवार, नवंबर 21, 2012

कितनी ही दीवारें

जाती व धर्म 
कितनी ही दीवारें 
खींची हमने ।
चाय-पानी से 
होता है हर काम 
कार्यलयों में ।
ईश्वर एक है 
ये कहते हैं सभी 
मानते नहीं ।
झूठा प्रचार 
होता है चुनावों में 
सभी के द्वारा ।

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4 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (25-11-2012) के चर्चा मंच-1060 (क्या ब्लॉगिंग को सीरियसली लेना चाहिए) पर भी होगी!
सूचनार्थ...!

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुंदर और सार्थक हाइकु....

Anita ने कहा…

अर्थपूर्ण हाईकु!
~सादर !

सुमन कपूर 'मीत' ने कहा…

बहुत सुंदर

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