रविवार, अक्तूबर 05, 2014

मुझे जाम पकड़ा दिया

एक यही मुकाम बाकी था, वो भी दिला दिया 
तेरी मुहब्बत ने मुझे जाम पकड़ा दिया । 

लुटा चमन तो ख़ुशी का मशविरा लगा ऐसे 
रुपया देकर जैसे किसी बच्चे को बहला दिया । 

बीते वक्त को भुला न पाया मैं शायद इसलिए 
इस मौजूदा वक़्त ने अब मुझे भुला दिया । 

कितना साफ़ झूठ है कि प्यार कुछ नहीं देता 
इसने मुझे सिसकियों का लम्बा सिलसिला दिया । 

दिल में ताजा रहे सदा याद तेरी इसलिए 
भरने को हुआ जब जख्म तो सहला दिया । 

तेरी हर हसरत ' विर्क ' खुदा करे हो पूरी 
अपनी हसरतों को मैंने मिट्टी में मिला दिया । 

दिलबाग विर्क 
******** 
काव्य संकलन - काव्य सुधा 
संपादक - प्रदीप मणि " ध्रुव "
प्रकाशन - मध्य प्रकाश नवलेखन संघ, भोपाल 
प्रकाशन वर्ष - 200 7 

4 टिप्‍पणियां:

Lekhika 'Pari M Shlok' ने कहा…

Bahut hi khubsurat gazal .... !!!

Kavita Rawat ने कहा…

तेरी हर हसरत ' विर्क ' खुदा करे हो पूरी
अपनी हसरतों को मैंने मिट्टी में मिला दिया ।

Rajeev Upadhyay ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता। कुछ ही शब्दों में बहुत कुछ कह दिया आपने। स्वयं शून्य

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

वाह ,वाह !!

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