बुधवार, मई 13, 2015

इस दिल दीवाने का क्या करें

अगर मुहब्बत की राह पर चला करें 
तो रफ़्ता-रफ़्ता मंज़िल की ओर बढ़ा करें । 

दग़ाबाज़ी हमारी हमें ले डूबेगी 
अभी भी वक़्त है, संभल जाएँ, वफ़ा करें । 

ज़िंदगी का दूसरा रुख दिखाई देगा 
ठंडे दिमाग से दूसरों की सुना करें । 

हालातों की ख़स्तगी कम होती नहीं 
आओ यारो मिलकर कोई दुआ करें । 

दुश्वारियाँ रास्ते की आसां हो जाएँ 
काश ! हम तूफ़ानों की सूरत उठा करें । 

जिसे चाहे बस उसी को ख़ुदा माने 
बता इस दिल दीवाने का क्या करें । 

देखना ' विर्क ' कहीं नासूर न बन जाएँ 
इन मुहब्बत के जख़्मों की दवा करें । 

दिलबाग विर्क 
*****

मेरे और कृष्ण कायत जी द्वारा संपादित पुस्तक " सतरंगे जज़्बात " से 

5 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत उम्दा अहसास...ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति..

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

बहुत सुन्दर
हक़–ओ-इन्साफ़

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई

रश्मि शर्मा ने कहा…

शानदार गज़ल

Jitendra tayal ने कहा…

ज़िंदगी का दूसरा रुख दिखाई देगा
ठंडे दिमाग से दूसरों की सुना करें ।

सुन्दर

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