बुधवार, सितंबर 07, 2016

याद

खुद को भूला
तुझको याद किया
कब जी पाया ।

याद जो आती
आँसुओं की बारिश
थम न पाती ।

कभी हंसाती
कभी खूब रुलाती
याद कमाल ।

दिलबाग विर्क 
*****

7 टिप्‍पणियां:

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

सुन्दर सारगर्भित हाइकू

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

सुन्दर सारगर्भित हाइकू

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

सुन्दर शानदार हायकू

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

सभअच्छे तीनों हाइकू सुन्दर है .

poet kavi ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (10-09-2016) को "शाब्दिक हिंसा मत करो " (चर्चा अंक-2461) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर ।

suvachhta.com ने कहा…

श्रीमान जी आपकी क़लम में बहुत तेज़ धार दिखाई पड़ती है।जो भी एक बार पद ले बार बार पड़ने को मन करता है।अच्छा लेखन भी एक कला है जो हर किसी को यूँ ही नही मिल जाता है।आपकी रचनाओं की सुगन्ध देर तक रहती है।

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