बुधवार, मार्च 13, 2019

अब तो दिल बहला रखा है


चंद रोज़ की मुश्किल थी, अब तो दिल बहला रखा है
तेरे जाने के बाद ग़म को अपने पास बुला रखा है।

जैसे तू ही है मेरी बाँहों में, यूँ समझता हूँ
तेरी याद को कुछ ऐसे सीने से लगा रखा है।

मेरे दिल की हर धड़कन पर लिखा है तेरा नाम
इस बात को छोड़ दें तो मैंने तुझको भुला रखा है।

डर है वक़्त की हवा फिर से सुलगा न दे इसको
कहकर बेवफ़ा तुझे, मुहब्बत को राख में दबा रखा है।

ये तो नहीं कि कभी बेचैन नहीं होता दिल मेरा
मगर देकर वफ़ा का नशा, तूफ़ां को सुला रखा है।

दिल जलेगा, अश्क बहेंगे, चैन लुटेगा, लोग हँसेगे
न मुहब्बत का ज़िक्र छेड़ विर्क, इसमें क्या रखा है।

दिलबागसिंह विर्क 
****** 

16 टिप्‍पणियां:

kamini sinha ने कहा…

बहुत खूब ,लाजबाब

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

Anita saini ने कहा…

वाह !बहुत ख़ूब

Virendra Singh ने कहा…

ये तो नहीं कि कभी बेचैन नहीं होता दिल मेरा
मगर देकर वफ़ा का नशा, तूफ़ां को सुला रखा है।


वाह,क्या बात है। सादर।

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना रविवार 17 मार्च 2019 के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (15-03-2019) को दोहे "होता है अनुमान" (चर्चा अंक-3275) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १५ मार्च २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन फाउंटेन पैन का शौक और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

मन की वीणा ने कहा…

उम्दा बेहतरीन दर्द लिये गजल।

sudha devrani ने कहा…

डर है वक़्त की हवा फिर से सुलगा न दे इसको
कहकर बेवफ़ा तुझे, मुहब्बत को राख में दबा रखा है।
बहुत लाजवाब.....
वाह!!!

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

बहुत ख़ूब दिलबाग विर्क जी. हफ़ीज़ जालंधरी के इस शेर से शायद आपको सुकून मिले -
क्यूँ हिज्र के नाले रोता है, क्यूँ दर्द के शिक़वे करता है,
जब इश्क़ किया तो सब्र भी कर, इसमें तो सभी कुछ होता है.

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुंदर...

Nitish Tiwary ने कहा…

बहुत बढ़िया।

आत्ममुग्धा ने कहा…

वाह

Onkar ने कहा…

bahut khoob

ज्योति सिंह ने कहा…

लाजवाब बहुत ही बढ़िया ,ग़ालिब की एक पंक्ति ध्यान में आ गई -है हमको उनसे वफा की उम्मीद जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

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