शुक्रवार, फ़रवरी 25, 2011

अगज़ल - 11

दोस्त बनाकर देखो , दुश्मनी में रखा क्या है 
खुदा का है हर आदमी , हर आदमी खुदा है ।

जमाने की निगाहों से न देखो तुम जिन्दगी को
ये सब गम लगें हैं ख़ुशी उसे जो बा - वफा है । 

यहाँ भी हो दिलों की कद्र वहीं सजदा कर दो 
तुम्हें क्या लेना कि वो का'बा है या मैकदा है । 

कान सुनेंगे कैसे , दरवाजे की दस्तक नहीं 
दिल से सुनो इसे , ये मुहब्बत दिल की सदा है ।

मतलबी दुनिया ने बनाए हैं बाकी सब नियम 
प्यार , वफा बस यही इंसानियत का कायदा है ।
हो सके तो ' विर्क ' दुश्मनों को भी गले लगाना 
यही जिन्दगी है , यही जिन्दगी का फलसफा है ।

दिलबाग विर्क
* * * * *
      सदा --- आवाज़ 
      फलसफा --- फिलासफी , दर्शन 
                  * * * * *

9 टिप्‍पणियां:

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

aapka jindagi aur uske falsafe ka batane ka najariya pyara laga..:)

ZEAL ने कहा…

.

Dilbag ji ,

Its indeed a lovely creation with a very beautiful message in it .

.

निर्मला कपिला ने कहा…

यहाँ भी हो दिलों की कद्र वहीं सजदा कर दो
तुम्हें क्या लेना कि वो का'बा है या मैकदा है .
सच कहा अगर आदमी इस बात को समझ ले तो सब झंझट समाप्त हो जायें। सार्थक सन्देश देती रचना के लिये बधाई।

ਡਾ. ਹਰਦੀਪ ਕੌਰ ਸੰਧੂ ने कहा…

दोस्त बनाकर देखो , दुश्मनी में रखा क्या है
खुदा का है हर आदमी , हर आदमी खुदा है
ਜਿਸ ਦਿਨ ਏਸ ਗੱਲ ਦੀ ਸਮਝ ਪੈ ਜਾਵੇਗੀ ਓਸ ਦਿਨ ਸਵਰਗ ਲੱਭਣ ਦੀ ਲੋੜ ਮੁੱਕ ਜਾਵੇਗੀ ਕਿਓਂ ਜੋ ਇਹ ਧਰਤੀ ਹੀ ਸਵਰਗ ਬਣ ਜਾਵੇਗੀ {

Kunwar Kusumesh ने कहा…

हो सके तो ' विर्क ' दुश्मनों को भी गले लगाना
यही जिन्दगी है , यही जिन्दगी का फलसफा है

बहुत प्यारी बात कही है आपने.

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

हो सके तो ' विर्क ' दुश्मनों को भी गले लगाना
यही जिन्दगी है , यही जिन्दगी का फलसफा है ....

बहुत खूब....बहुत ही उम्दा फलसफा है ....

सार्थक रचना....बधाई...

anju(anu) choudhary ने कहा…

कान सुनेंगे कैसे , दरवाजे की दस्तक नहीं
दिल से सुनो इसे , ये मुहब्बत दिल की सदा है .....


वाह बहुत खूब

anju(anu) choudhary ने कहा…

कान सुनेंगे कैसे , दरवाजे की दस्तक नहीं
दिल से सुनो इसे , ये मुहब्बत दिल की सदा है ....

वाह बहुत खूब

Kailash Sharma ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति...हरेक शेर जीवन दर्शन से आपूरित..बहुत खूब!

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