शुक्रवार, सितंबर 14, 2012

हिंदी की पुकार ( कविता )

मैं हिंदी हूँ 
हिन्दुस्तान की बेटी हूँ 
न देखो मुझे 
किसी जाति से जोड़कर 
किसी सम्प्रदाय से जोड़कर 
किसी क्षेत्र से जोड़कर 
कश्मीर से कन्याकुमारी तक 
चाहती हूँ प्यार सबका 
बांटती हूँ प्यार सबको 
पिरोती हूँ एक सूत्र में 
पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली 
सभी भाषाएँ हैं भगिनी मेरी 
चल सकती हूँ मैं साथ सबके
ओ हिंद वासियों 
सुनो पुकार मेरी  
न करो विरोध मेरा 
किसी भाषा को लेकर 
छोडो संकीर्णता 
तोड़ो भाषाई बंधन 
जुडो़ मुझसे 
मुझसे जुड़कर जुडो़गे तुम 
इस देश से 
खुद से 
मैं हिंदी हूँ 
हिन्दुस्तान की बेटी हूँ ।

**************

4 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

हिन्दीदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आपका इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (15-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

मैं हिंदी हूँ हिन्दुस्तान की बेटी हूँ ,कोख में दफ़न न कर देना मुझको .अंग्रेजी हिन्दुस्तान का बेटा है मैं बेटी ,हरदम दुभांत सहती .

ram ram bhai
शनिवार, 15 सितम्बर 2012
सज़ा इन रहजनों को मिलनी चाहि

सुशील ने कहा…

हार्दिक शुभकामनाएँ!
हिन्दी का दिवस
महीना साल ना बनायें
बस हिन्दी के हो जायें!

मन के - मनके ने कहा…

धन्यवाद, चर्चामंच की सुंदर प्रस्तुतिकरण के लिये.

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