शनिवार, सितंबर 29, 2012

बेवफाई ( हाइकु )

बेटा चाहिए 
बेटी का है आज भी 
दर्जा दोयम ।
बस्तों का बोझ 
ढो रहा बचपन 
ये कैसी शिक्षा ?
बेवफाई तो 
आदत आदमी की 
हर क्षेत्र में ।
झूठा प्रचार 
होता है चुनावों में 
सबके द्वारा ।

******************

5 टिप्‍पणियां:

expression ने कहा…

बढ़िया....
सार्थक हायेकु..

सादर
अनु

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (01-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

सुन्दर सहज अभिव्यक्त हुए हैं ये हाइकु -
नेताओं की ,
हरदम ,
पौ बारह .

सुशील ने कहा…

सुंदर !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

.


बंधुवर दिलबाग विर्क जी

सुंदर और सार्थक हाइकु लिखे हैं…
बस्तों का बोझ
ढो रहा बचपन
ये कैसी शिक्षा ?

बहुत ख़ूब !

पूरी पोस्ट पसंद आई
आपकी कुछ न पढ़ी हुई रचनाओं का भी आज आनंद लिया …
अच्छा काम कर रहे हैं आप …

शुभकामनाओं सहित…
राजेन्द्र स्वर्णकार

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