शनिवार, सितंबर 28, 2013

शतरंजी चालें क्या तुमने देखी हैं

       
            दिन खुलकर हँसते हैं, रातें रोती हैं ।
            कुदरत की बातें भी मेरे जैसी हैं ।

            आँसू कहता कोई कहता है शबनम
            कोई फर्क नहीं, ये बूँदें मोती है ।

            कुछ तो राज छुपा है उनकी बातों में
            सबसे छुपकर जो सिर जोड़े बैठी हैँ ।

            लोग चला करते पर्दे के पीछे से
            शतरंजी चालें क्या तुमने देखी हैं ?

            जो बातें ढल पाई मेरी ग़ज़लों में
            कुछ जग पर बीती, कुछ खुद पर बीती हैं ।

            रिश्तों में ' विर्क ' दरार यही डालेंगी
            जो बातें अब लगती छोटी-छोटी हैं ।
                         ***********

1 टिप्पणी:

Lalit Chahar ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..


हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल पर आज की चर्चा : पीछे कुछ भी नहीं -- हिन्दी ब्लागर्स चौपाल चर्चा : अंक 012

ललित वाणी पर : इक नई दुनिया बनानी है अभी

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