मंगलवार, सितंबर 05, 2017

बारिशों का दौर

सावन में 
थमता ही नहीं 
बारिशों का दौर 
कभी बादल बरसते हैं 
कभी आँखें 

बादलों के बरसने से 
लहक उठती है प्रकृति 
और आँखों के बरसने से 
मुस्कराने लगते हैं ज़ख्म 
हरियाली ही हरियाली होती है 
प्रकृति में भी
जख्मों में भी 

ये बारिशें 
सिर्फ हरियाली ही नहीं लाती 
उमस भी लाती हैं 
उमस से फिर घिरने लगते हैं बादल 
आसमान पर काले बादल
दिल पर अवसाद के बादल 
फिर शुरू होता है बारिशों का दौर 
बारिशें ही बनती हैं कारण 
अगली बारिशों का 

आँखें हों या बादल
खाली हो होकर भरते हैं 
भर-भर कर खाली होते हैं !

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दिलबागसिंह विर्क 

4 टिप्‍पणियां:

Pammi ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति..

#Ye Mohabbatein ने कहा…

khubsurat abhivyakti.

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुन्दर।

संजय भास्‍कर ने कहा…

प्रेम से परिपुर्ण सुंदर अभिव्यक्ति

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