बुधवार, दिसंबर 29, 2010

षटपदीय छंद - 1

                                                   ( व्यंग्य
         
       आदर्शवादी होकर  ,  बने सिर्फ नाम के 
       चमचागिरी करके तुम , हो जाओ काम के .
       हो जाओ काम के , होगा तुम्हारा नाम 
       करना चाहे उल्टे  ,  सीधे पड़ेंगे काम .
       कामयाब हैं वही  ,  जो समझौतावादी 
       कहता ' विर्क ' सबसे , क्यों हो आदर्शवादी . 

                    * * * * *                                    

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (30-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ...!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार (06-08-2013) के "हकीकत से सामना" (मंगवारीय चर्चा-अंकः1329) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

बेनामी ने कहा…

My programmer is trying to convince me to move to .net from
PHP. I have always disliked the idea because of the costs.

But he's tryiong none the less. I've been using WordPress on a number
of websites for about a year and am anxious about switching to another
platform. I have heard very good things about blogengine.net.
Is there a way I can import all my wordpress posts into it?
Any help would be greatly appreciated!

Here is my site: Metatarsal Pads

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