मंगलवार, दिसंबर 24, 2013

आँखों में मैखाने

हर सू , हर शै में हमको वो दिखते हैं
जब भी दिल जुड़ते, नैन मिला करते हैं ।

इश्क़ किया जाता कैसे, सुन लो यारो
कुछ तो कहते परवाने, जब जलते हैं ।

किसमें दम इतना, कौन मुकाबिल तेरे
चाँद - सितारे  तेरा  पानी  भरते  हैं  ।

पीने  वाले  बदनाम  हुए  हैं  नाहक
वो आँखों में मैखाने लिए फिरते हैं ।

यूँ  लगता  है,  तेरे  गेसू  हों  जैसे
जब पगलाने वाले बादल घिरते हैं ।

दर्द  बँटा  लेते  हैं  जब  हम औरों  का
जीवन में विर्क खुशी के गुल खिलते हैं ।

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7 टिप्‍पणियां:

Tushar Raj Rastogi ने कहा…

बेहद सुन्दर रचना | जय हो |

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

वाह...बहुत ही अच्छी और भावपूर्ण रचना.....बधाई....

Shikha Gupta ने कहा…

बहुत सुंदर भाव ...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (26-12-13) को चर्चा - 1473 ( वाह रे हिन्दुस्तानियों ) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

abhishek shukla ने कहा…

बहुत खूबसूरत....वंदे मातरम्: थकान

देवदत्त प्रसून ने कहा…

अच्छी भावात्मक प्रस्तुति है !

देवदत्त प्रसून ने कहा…

अच्छी भावात्मक प्रस्तुति है !

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