बुधवार, जनवरी 30, 2013

गाँधीवाद ? ( हाइगा )


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4 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

यह हाइकू तो बहुत सटीक रहा!

Devdutta Prasoon ने कहा…

छोटे छोटे हाइगा,कितनी गहरी चोट !
खुरच खुरच कर काढ दे समाज की हर खोट ||

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

खादी अगर अब तक है तो चरखा भी होना लाज़मी है उसका रूप भले ही बदल गया हो


बढिया हाइगा

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