रविवार, नवंबर 06, 2011

निर्णय के क्षण ( कविता ) भाग-1

              नियति, नियति, नियति 
       कितनी जालिम है यह नियति 
       जो बाँट देती है 
       हर इंसान के दिल को 
       दो टुकड़ों में 
       और बना देती है 
       मैदान अंतर्द्वंद्व का ।
       कोई कायर हो या वीर 
       शूद्र हो या क्षत्रिय शूरवीर 
       सबको डसती ही आई है यह 
       सदियों से ।

          इस नियति ने 
        डसा था उसको भी 
        जो क्षत्रिय भी था 
        और शूद्र भी 
        जो शूरवीर भी था 
        और दानवीर भी 
        लेकिन न तो उसकी शूरवीरता  
        और न ही उसकी दानवीरता 
        बचा पाई उसे 
        इस क्रूर नियति के बाहुपाश से ।

        वह आज खड़ा है 
        इसकी लपेट में 
        आज ही क्या 
        बचपन से 
        या यूं कहें कि
        जन्म के पहले से ही
        वह इसकी लपेट में है ।
        नियति ही उसकी माता है 
        नियति ही उसका पिता है 
        और इसी नियति ने 
        उसके जीवन को डसा है ।
        उसकी नियति के कारण ही 
        कुंती ने 
        सूर्य का स्मरण किया था 
        इस नियति के कारण ही 
        इंद्र ने ब्राह्मण बनकर 
        उसे ठगा था । 
                               ( क्रमश: )

                  * * * * *

14 टिप्‍पणियां:

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

नियति को केंद्र में रख व्यक्त सुंदर कथ्य

संगीता पुरी ने कहा…

अच्‍छी शुरूआत है ..
अगली कडी का इंतजार रहेगा !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सच है नियति से कोई नहीं बचा है ..कर्ण जैसा शूरवीर भी नहीं .. अच्छी प्रस्तुति

Sunil Kumar ने कहा…

नियति के माध्यम से अद्भुत रचना तर्कों में बढ़ी हुई ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

Kunwar Kusumesh ने कहा…

अद्भुत रचना.

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा आज दिनांक 07-11-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत उम्दा!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! सूचनार्थ!

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत सुंदर कविता. अगली कड़ी का भी इन्तेज़ार रहेगा.

बधाई और शुक्रिया.

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

बहुत अच्छी शुरूआत...बधाई|

Rajesh Kumari ने कहा…

niyati ke jaal se koi nahi bach paya...bahut sundar rachna...agli kadi ka intjaar rahega.

चन्दन..... ने कहा…

सही कहा आपने नियति के कारण हि ठगा गया था कर्ण!

anju(anu) choudhary ने कहा…

bahut sahi samikran kiya hai aapne...

Pallavi ने कहा…

नियति को ध्यान में रख कर कर्ण को चुना आपने,... आभार बहुत सुंदर रचना

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