बुधवार, मई 22, 2013

दिल की धरा



जो दे सके साया, ऐसा कोई दरख्त ही नहीं 
गम के आफताब से झुलस रही है दिल की धरा

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3 टिप्‍पणियां:

सरिता भाटिया ने कहा…

खुबसूरत पंक्तियाँ

kunwarji's ने कहा…

बहुत खूब!

कुँवर जी,

Abhimanyu Bhardwaj ने कहा…

बहुत सुन्‍दर और सार्थक रचना आभार
हिन्‍दी तकनीकी क्षेत्र की अचंम्भित करने वाली जानकारियॉ प्राप्‍त करने के लिये एक बार अवश्‍य पधारें
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