बुधवार, जुलाई 01, 2015

इतनी हल्की मेरी चाहत नहीं

माना तुझे अब मुझसे उल्फ़त नहीं 
फिर भी मैं कर सकता नफ़रत नहीं । 
तेरा चेहरा खिला रहे सदा ही 
इसके सिवा कोई भी हसरत नहीं । 

बदले में माँगे तुझसे क़ीमत 
इतनी हल्की मेरी चाहत नहीं । 

बेहतर है, खुद ही संभलकर रहें 
लोगों को किसी की मुरव्वत नहीं । 

तेरे ग़म में इतना उलझा हूँ मैं 
तुझे सोचने तक की फ़ुर्सत नहीं । 

मेरी वफ़ा ' विर्क ' मेरा साथ छोड़े 
होगी इससे बढ़कर क़यामत नहीं । 

दिलबाग विर्क 
*****
मेरे और कृष्ण कायत जी द्वारा संपादित पुस्तक " सतरंगे जज़्बात " से 


6 टिप्‍पणियां:

Jitendra tayal ने कहा…

तेरे ग़म में इतना उलझा हूँ मैं
तुझे सोचने तक की फ़ुर्सत नहीं ।

शानदार

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत सुंदर

Kavita Rawat ने कहा…

बदले में माँगे तुझसे क़ीमत
इतनी हल्की मेरी चाहत नहीं ।
..वाह! बहुत सुन्दर
वह प्यार ही क्या जिसमें हल्कापन हो ...

रश्मि शर्मा ने कहा…

क्‍या बात है..बहुत खूब लि‍खा आपने

Mukul Kumari Amlas ने कहा…

बेहतरीन शेर ।

Mukul Kumari Amlas ने कहा…

बेहतरीन शेर ।

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