शनिवार, जनवरी 22, 2011

अग़ज़ल - 8

जहां में ख़ुशी फैलाकर देखो 
       रोते हुए को हँसाकर देखो ।          

खुदा पाना मुश्किल तो नहीं 
किसी को अपना बनाकर देखो ।
इस रौशनी की अहमियत क्या है 
लौ चिरागों की बुझाकर देखो ।

शायद किसी का भला हो जाए 
कडवे सच को छुपाकर  देखो ।

यह जमाना नेकनीयत लगेगा 
कभी खुद को ही भुलाकर देखो ।

दुश्मनी खुद-ब-खुद छूट जाएगी 
दुश्मन को प्यार से बुलाकर देखो ।

इश्क़ में लुटने का भी मज़ा है 
' विर्क ' अपना दिल लुटाकर देखो ।

दिलबाग विर्क 
   * * * * *

2 टिप्‍पणियां:

kkk ने कहा…

TUMHE DILLAGI BHUL JANI PADEGI,
MOHABBAT ME DIL LAGA KE DEKHO .

APNA SA LAGEGA YE SARA JAMANA,
JAMANE KE BICH JAKAR KE DEKHO .

HAMEN YU NA SAMJHO APNA DUSHMAN,
DOSTI KA HATH BADAKAR KE DEKHO .

ZEAL ने कहा…

इश्क में लुटने का भी मज़ा है
' विर्क ' अपना दिल लुटाकर देखो ....

सही कहा..इश्क में डूबने का अपना एक अलग ही मज़ा है।

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