गुरुवार, अप्रैल 11, 2013

चुप्पी

फेसबुक पर कभी कभार कुछ पंक्तियाँ टांक देता हूँ, साहित्य से कोई गहरा सम्बन्ध तो मेरे ब्लॉग लेखन में भी नहीं , अत: वहां भी इसकी कोई संभावना नहीं । इन्हीं पंक्तियों को अब ब्लॉग पर पोस्ट करने का इरादा है । 


क्यों शोर मचाना ही जायज लगता है तुम्हें 
नाराजगी का इजहार चुप्पी से भी होता है । 

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1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर कता!
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नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ ......
मातारानीं आपकी सभी मनोकामनाऐं पूर्ण करे !

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