शुक्रवार, जुलाई 12, 2013

खुशबू

जेहन के दरवाजे पर लाख लगाओ नफरत की साँकलें 
मुहब्बत एक खुशबू है यारो, ये भीतर आकर रहेगी ।

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3 टिप्‍पणियां:

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

खुशबू रोके नहीं रुक सकती वो तो चारों ओर फैल कर ही रहेगी :))

Kailash Sharma ने कहा…

बिल्कुल सटीक कथन...

Mahesh Barmate ने कहा…

वाह !
क्या खूब कहा है...

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