मंगलवार, जुलाई 30, 2013

मुझे माफ करना

अगर तलवार के हक़ में हो जाऊँ तो मुझे माफ करना
कलम को हर रोज हारते देखकर बहुत बेचैन हूँ मैं ।

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2 टिप्‍पणियां:

सुशील ने कहा…

तलवार से ही लिख लीजिये फिर तो !

Devdutta Prasoon ने कहा…

दुर्घटना में हाथ टूटने से आप सब से इतने समय से अलग रहने का दंश झेलना पड़ा |अभी भी दाहिने हाथ की उंगलियाँ सीधी नहीं हो पा रही हैं |
बड़े कीमती गधे आप ने शेरोन के मोती |
आर मोती की आभा साआरा अन्धकार धोती ||

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