मंगलवार, दिसंबर 27, 2011

अग़ज़ल - 31


  ऐसे  लगता  है  जैसे  यह  जिन्दगी  देवदासी  है 
  बाँट दी हैं सब खुशियाँ, मेरे पास सिर्फ उदासी है ।

  बड़े  अरमानों  से  देखा  था  तेरी  ओर, ऐ  आसमां 
  क्यों छुपा लिया चाँद तूने, क्यों लौटी नजर प्यासी है ?

  मैं पागल था जो उसकी बातों को सच समझता रहा 
  अब पता चला, प्यार का हर मंजर सिर्फ कियासी है ।

  हैरत  हुई  है  दिल  को  उन्हें  रंग  बदलते  देखकर 
  मालूम न था इसे, इस युग का हर शख्स सियासी है ।

  यह अहसास तो है, दर्दे-दिल की इंतिहा नहीं होती 
  फिर भी लगता है कि हर रात गम की इंतिहा-सी है ।

  फिर मिलने की उम्मीद तो रख लेते हम मगर विर्क
  कैसे करें भरोसा, इस दिल की धडकन बेवफा-सी है ।

                   * * * * *

7 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर गज़ल्।

veerubhai ने कहा…

बहुत सुन्दर अ -ग़ज़ल .अभी तक अ -कविता पढ़ी थी .नै कविता पढ़ी थी .

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

ye jindagi rang badalti hai..kabhi devdaasi kabhi paaro lagti hai..shandar.....aghazal aaur ghazal me kya fark hai ..mujhe iski jaankari nahi hai...sadar badhayee aaur amantran ke sath

संजय भास्कर ने कहा…

यह अहसास तो है, दर्दे-दिल की इंतिहा नहीं होती
फिर भी लगता है कि हर रात गम की इंतिहा-सी है ।
हमेशा की तरह ये पोस्ट भी बेह्तरीन है
कुछ लाइने दिल के बडे करीब से गुज़र गई....

संजय भास्कर ने कहा…

.......नववर्ष आप के लिए मंगलमय हो

शुभकामनओं के साथ
संजय भास्कर
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

dr.mahendrag ने कहा…

अब पता चला, प्यार का हर मंजर सिर्फ कियासी है ।

ACHHI DIL KO CHULENE WALI GAZAL

expression ने कहा…

बेहतरीन शेर....
बढ़िया ग़ज़ल.......

सादर
अनु

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