रविवार, अप्रैल 06, 2014

मैं कहूँ मिसरा, बना दे शे'र तू

उम्र  से  है  बेहतर ,  ये  एक  पल 
चल जहाँ तक हो सके, तू साथ चल । 

सीख  ले  जीना , मिली है जिंदगी 
वक्त का पहिया चले कल, आज, कल । 

है मुहब्ब्त का तरीका बस यही 
प्यार पाने के लिए खुद को बदल । 

गलतियों को देखना तू छोड़ दे 
भूलकर सब कुछ , कभी तो कर पहल । 

ये सियानफ मार डालेगी तुझे 
दिल न बन नादान, बच्चे-सा मचल । 

मैं कहूँ मिसरा, बना दे शे'र तू 
इस तरह से ' विर्क ' पूरी हो ग़ज़ल । 
*********

4 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

गलतियों को देखना तू छोड़ दे
भूलकर सब कुछ , कभी तो कर पहल ।
...वाह...सभी अशआर लाज़वाब...बहुत उम्दा प्रस्तुति...

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

बहुत बढ़िया सौद्देश्य ग़ज़ल कही है भाईसाहब क्या सयानप (सयाने पण को कहते हैं ?)कृपया बतलाएं।

खूबसूरत शैर कहा है :

मैं कहूँ मिसरा बना दे शैर तू ,

इस तरह से 'विर्क' पूरी हो ग़ज़ल।

ये सयानप मार डालेगी तुझे ,

दिल न बन नादाँ ,बच्चे -सा मचल

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

भाईसाहब क्या सयानप (सयाने पन को कहते हैं ?)कृपया बतलाएं।

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

अति सूधौ सनेह का मारग हैं ,

इसमें नहीं नैंक सयानप देख सखे

इस मार्ग में सियानापन ,होश्यारी नहीं चलेगी।

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